चिंकी जंगल के सूखे हिस्से में चल रही थी। अचानक उसकी नज़र कुछ चमकते हुए पर पड़ी।
झाड़ियों के बीच एक चमकता हुआ सुनहरा बीज चमक रहा था। चिंकी ने उसे अपने पंजों में उठाया। यह कुछ खास था।
चिंकी बबू कछुए के पास पहुँची। वह बूढ़े पेड़ के नीचे आराम कर रहा था।
चिंकी ने बबू को जगाया। बबू ने कहा, 'यह जादुई बीज है। इसे सच्चे दिल से लगाओ।' चिंकी सोच में पड़ गई।
चिंकी ने धीरे से ज़मीन पर खोदकर बीज रख दिया। उसने हल्के से मिट्टी से ढक दिया।
पानी देने के बाद, ज़मीन से एक छोटी सी हरी अंकुर निकली। हवा में हिलने लगी। चिंकी मुस्कुरा दी।
रात हो गई। चिंकी अपने बिल में लौटी। उसे नींद नहीं आ रही थी। बहू बर-बर बाहर झाँकती।
उसे चिंता थी कि बहू ठीक से उग पाएगा या नहीं। वह बार-बार बाहर झाँकती और तुरंत वापस आ जाती।
अचानक चिंकी की नज़र कुछ चमकती हुई रोशनी पर पड़ी। झाड़ी के पास कुछ चमक रहा था।
वह उगी हुई पौधे के फूल थे। सुनहरे रंग में चमक रहे थे। चिंकी की आँखें खुशी से फ़ैल गईं।
चिंकी ने फूलों को देखा। उसके चेहरे पर शांति थी। वह गहरी नींद में सो गई।
सुबह की पहली किरण बबू कछुए के पेड़ पर पड़ी। चिंकी की नींद खुल गई। सामने सुनहरे फूल खिले थे।