मीनाक्षी अपनी टोटि-फूटी झोपड़ी की दरार वाली फर्श को झाड़ रही थी। अचानक तेज हवा ने उसके सिक्के को बाहर उछाल दिया। वह चीखी और दौड़ी, लेकिन बटन जंगली गेट से निकलकर धूल भरी सड़क पर लुढ़क गया।
सिल्वर बटन रस्तों पर लुढ़कता हुआ एक सोए हुए कुत्ते के पास पहुँचा। मीनाक्षी धीरे से कदम बढ़ाती गई, सांस रोके हुए। उसकी आँखें बटन और कुत्ते के बीच घूम रही थीं, डर और उम्मीद से भरी हुईं।
कुत्ते की पूंछ ज़मीन पर ठोकने लगी। मीनाक्षी ने हाथ बढ़ाया, लेकिन कुत्ते ने एक आँख खोली—चमकदार पीली पुतली! वह जम गई, बटन अब भी इंचों दूर था, और समय थम सा गया।
कुत्ते ने जोर से यॉन् किया और अपने लंबे पैरों को खींचा। उसने भीगे नाक से बटन को मीनाक्षी के पैर के पास धकेल दिया। फिर वह वापस मुड़कर सो गया, और उसकी हल्की खर्राटे ने मीनाक्षी के बालों को हिला दिया।
मीनाक्षी ने बटन उठा लिया। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह अनोखा तोहफा मिला है। उसने मुस्कुराते हुए कुत्ते की ओर देखा, जो अब गहरी नींद में था। उसका दिल खुशी से भर गया।
वह भागती हुई अंदर आई और अपने पुराने शर्ट पर बटन सुई लगा दिया। छोटे शीशे में अपनी प्रतिबिंब देखकर वह और भी मुस्कुरा दी। इस छोटी सी चीज़ ने उसकी दुनिया को रोशन कर दिया।
उसने खुशी से एक धुन गाई। बाहर की धूल और शोर सब भूलकर, वह अपने आरामदायक घर में शांत थी। उसका छोटा सा संसार अब और भी खास लग रहा था।
रात होने लगी, और झोपड़ी के बाहर चाँद निकल आया। मीनाक्षी ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उस चमकदार बटन की याद में जो आज उसकी दोस्ती का प्रतीक बन गया था। वह सुकून से सो गई।