मीरा ने अपने पारदर्शी पंख फैलाए और बगीचे के ऊपर हवा में तैरती हुई ठहरी। उसने हाँफते हुए देखा — कचरे जैसे धुंधले गुलाब, राख के समान उदास अलसी, और आसमान जो नीला होना भूल गया था। "यह क्या हुआ?" उसने विस्मित होकर सोचा। पूरा जंगल रंगहीन बन चुका था, जैसे कोई जादू ग़ायब हो गया हो।
मीरा एक मोर के पास पहुँची जो अपने म্লान पंखों को सहला रहा था। "रंग कहाँ चले गए?" उसने पूछा। मोर ने अपना सिर झुकाया और चुपचाप पंख से सरस्वती गुफा की ओर इशारा किया।
मीरा गुफा के मुँह पर पहुँची और ज़ोर से बोली, "हाँ तो? रंग? कृपया वापस आ जाओ!" सिर्फ गूँज लौटी। एक छोटी चूहा नाक हिलाता हुआ गुज़रा। मीरा ने ठंडी राख भरी मिट्टी पर हाथ रखा और सोचा — उसे अंदर जाना होगा।
गुफा के अंदर गहरा सन्नाटा था। पत्थर की गुंजाइश में मीरा की आवाज़ गूंजती रही। उसने हिम्मत जुटाई और एक-एक करके कदम अंदर रखे। अंधेरे में से तीन हल्की सी चमक दिखाई दी — एक लाल, एक पीली, एक नीली।
तीनों रत्न एक पत्थर की पीठिका पर रखे थे — लेकिन मोटी राख की परत ने उन्हें ढक लिया था। मीरा ने अपनी आستिन से लाल रत्न रगड़ा, फिर अपने पंख से पीला, फिर अपने जूते से नीला। हर रत्न एक बार झपक्या और फिर बंद हो गया।
राख का बादल उड़ गया। मीरा ने छींक ली — आह-चू! — और दोबारा छींक ली। रत्न फिर से बंद हो गए। मीरा ने नाराज़ होकर पैर पटक दिया। तभी — रत्नों से तेज़ रोशनी फूट पड़ी!
गुफा से बाहर जंगल में रंग वापस आने लगे — लेकिन धीमे-धीमे और टुकड़े-टुकड़े। एक लाल फूल यहाँ, एक नीला तितली वहाँ। मीरा ने हाथ हिलाए, रंग भयभीत पक्षियों की तरह छिटक गए।
एक तोता मीरा के कंधे पर आकर बैठ गया। "ये मिक्स होने चाहिए!" वह बोल पड़ा। मीरा ने अपनी हथेलियाँ एक साथ जोड़ीं और रंग घूमने लगे — लाल और पीला मिलकर नारंगी हो गए, नीला और पीला हरा।
आसमान में एक इंद्रधनुष कamana खिंच गया — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी। हर रंग जंगल में बरस रहा था जैसे जादुई बारिश।
मीरा जंगल के ऊपर तैरती रही। मोर ने अपने रंगीन पंख फैलाए — हरियाली, नीलम, सोने जैसी चमक। जगन्नाथों ने नेॉन हरे और गुलाबी रोशनी में टिमटिमाना शुरू किया।
जंगल की हर डाली पर रंग लौट आया था। फूल सूरज की रोशनी पी रहे थे जैसे बच्चे दूध पीते हैं। मीरा ने एक गुलाबी कमल पर आकर आराम किया और अपने पंख सींग लिए।
मीरा ने आसमान की ओर देखा। नीला आसमान, सफेद बादल, रंग-बिरंगे पक्षी। उसकी आँखों में एक मुस्कान थी — पूरा जंगल फिर से जीवित हो चुका था, और यह सब उसके कारण था।
सूरज ढलने लगा और जंगल में एक नया जादू जाग उठा — हर पत्थर, हर पत्ती, हर फूल चमक रहा था। मीरा ने देखा कि उसका प्यारा जंगल फिर से रंगों से भर गया है।
मीरा उड़ती हुई गुफा के पास से गई। तीन रत्न अब चमक रहे थे — लाल, पीला, नीला — बिना किसी राख के। उन्होंने शायद ही कभी इतनी खूबसूरती से नहीं चमका था।
रात हो गई। जगन्नाथों ने पूरे जंगल को रोशन कर दिया — नेॉन हरे और गुलाबी ज्योतियाँ हवा में नाच रही थीं। मीरा ने एक पत्ते पर आराम किया और सितारों की ओर देखा।
मीरा ने आँखें बंद कीं। उसके इर्द-गिर्द पूरा जंगल धीमे स्वर में गुनगुना रहा था — रंगों का गाना। वह मुस्कुराई और सो गई, यह जानते हुए कि कल सुबह फिर से सब कुछ रंगीन होगा।