रामू रोज़ सुबह जंगल जाता। उसका टोकरी ख़ाली थी।
एक दिन बंदर पेड़ से नीचे आया। उसने एक आम उठा लिया और भाग गया।
रामू ने बीज उठाया। उसने बीज बो दिया।
अगले सुबह एक छोटा पेड़ खड़ा था — सोने के आमों से भरा!
रामू ने पत्ते छुए। वे ताली की तरह खनखनाए।
बंदर वापस आया। इस बार वह फल लेकर आया था।
रामू ने आम दिया। बंदर ने सिर खरोंचा।
अब दोनों साथ जंगल जाते।
वे मिलकर टोकरी भरते।
गाँव का बाज़ार भरा हुआ था। रामू मुस्कुराता रहा।